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mahabharat 3.162.10-11h: नरेश्वर! अब तुम पुनः यहाँ से राजर्षि आर्ष्टिषेण के आश्रम में जाओ और कृष्ण पक्ष में शोक और भय से मुक्त रहो। 10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  3.162.10-11h 
आर्ष्टिषेणस्य राजर्षे: प्राप्य भूयस्त्वमाश्रमम्॥ १०॥
तामिस्रं प्रथमं पक्षं वीतशोकभयो वस।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! अब तुम पुनः यहाँ से राजर्षि आर्ष्टिषेण के आश्रम में जाओ और कृष्ण पक्ष में शोक और भय से मुक्त रहो। 10 1/2॥
 
Nareshwar! Now once again, go from here to the ashram of Rajarshi Arshtishen and remain free from sorrow and fear throughout the Krishna Paksha. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)