श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  3.161.63 
एष शापो मया प्राप्त: प्राक् तस्मादृषिसत्तमात्।
स भीमेन महाराज भ्रात्रा तव विमोक्षित:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! पूर्वकाल में मुझे महामुनि अगस्त्य से यही शाप मिला था, जिससे आपके भाई भीमसेन ने मुझे मुक्त कर दिया है।
 
Maharaja Yudhishthira! In the past, I had received this same curse from that great sage Agastya, from which your brother Bhimasena has freed me.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि यक्षयुद्धपर्वणि कुबेरदर्शने एकषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत यक्षयुद्धपर्वमें कुबेरदर्शनविषयक एक सौ इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)