Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.161.55-56: वे भयंकर यक्ष नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे। मार्ग में मैंने यमुना नदी के तट पर घोर तपस्या कर रहे महर्षि अगस्त्य को देखा। वह क्षेत्र नाना प्रकार के पक्षियों से भरा हुआ था और वृक्षों के विस्तृत वनों से सुशोभित था। 55-56। | mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे भयंकर यक्ष नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे। मार्ग में मैंने यमुना नदी के तट पर घोर तपस्या कर रहे महर्षि अगस्त्य को देखा। वह क्षेत्र नाना प्रकार के पक्षियों से भरा हुआ था और वृक्षों के विस्तृत वनों से सुशोभित था। 55-56।
Those fearsome Yakshas were carrying various kinds of weapons. On the way I saw the great sage Agastya who was performing severe penance on the banks of the river Yamuna. That region was full of various kinds of birds and was adorned with developed groves of trees. 55-56.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥