श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.161.54 
धनेश्वर उवाच
देवतानामभून्मन्त्र: कुशवत्यां नरेश्वर।
वृतस्तत्राहमगमं महापद्मशतैस्त्रिभि:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कुबेर बोले, "हे मनुष्यों के स्वामी! प्राचीन काल में कुशावती में देवताओं की एक सभा हुई थी। मुझे भी उसमें आमंत्रित किया गया था। मैं तीन सौ महान यक्षों के साथ वहाँ गया था।"
 
Kubera said— O Lord of men! In ancient times a meeting of the gods was held in Kushavati. I was also invited to it. I went there with three hundred great Yakshas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)