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mahabharat 3.161.53: मैं इस बात पर आश्चर्य कर रहा हूँ कि उस बुद्धिमान् मुनि के क्रोध से आप उसी समय अपने सेवकों और सैनिकों सहित जलकर भस्म क्यों नहीं हो गए?॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.161.53 
इदं चाश्चर्यभूतं मे यत् क्रोधात् तस्य धीमत:।
तदैव त्वं न निर्दग्ध: सबल: सपदानुग:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
मैं इस बात पर आश्चर्य कर रहा हूँ कि उस बुद्धिमान् मुनि के क्रोध से आप उसी समय अपने सेवकों और सैनिकों सहित जलकर भस्म क्यों नहीं हो गए?॥ 53॥
 
I am astonished at the fact that why did you not get burnt to ashes along with your servants and soldiers at that very moment due to the anger of that wise sage?॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)