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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट
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श्लोक 52
श्लोक
3.161.52
युधिष्ठिर उवाच
कथं शप्तोऽसि भगवन्नगस्त्येन महात्मना।
श्रोतुमिच्छाम्यहं देव तवैतच्छापकारणम्॥ ५२॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु ! महात्मा अगस्त्य ने आपको किस प्रकार शाप दिया ? हे प्रभु ! आपको शाप मिलने का क्या कारण है ? मैं यह सुनना चाहता हूँ ॥ 52॥
Yudhishthira asked - O Lord! How did Mahatma Agastya curse you? O Lord! What is the reason for you being cursed? I want to hear this. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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