श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.161.46 
न भीमसेने कोपो मे प्रीतोऽस्मि भरतर्षभ।
कर्मणा: भीमसेनस्य मम तुष्टिरभूत् पुरा॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'भरतश्रेष्ठ! मैं भीमसेन से नाराज़ नहीं हूँ। मैं उनसे प्रसन्न हूँ। मैं पहले भी उनके कर्मों से प्रसन्न रहा हूँ।'
 
'Bhaarat Shrestha! I am not angry with Bhimasena. I am pleased with him. I have been pleased with Bhimasena's deeds earlier too.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)