Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.161.43: 'कुन्तीनन्दन! सब प्राणी जानते हैं कि आप सब प्राणियों का कल्याण करने में सदैव तत्पर रहते हैं। अतः आप अपने भाइयों सहित इस पर्वत शिखर पर निर्भय होकर निवास करें।॥43॥   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.161.43 
विदुस्त्वां सर्वभूतानि पार्थ भूतहिते रतम्।
निर्भयश्चापि शैलाग्रे वस त्वं भ्रातृभि: सह॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! सब प्राणी जानते हैं कि आप सब प्राणियों का कल्याण करने में सदैव तत्पर रहते हैं। अतः आप अपने भाइयों सहित इस पर्वत शिखर पर निर्भय होकर निवास करें।॥43॥
 
'Kuntinandan! All beings know that you are always ready to do good to all beings. Therefore, you should stay fearlessly on this mountain peak along with your brothers. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)