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mahabharat 3.161.38-39: अपने विमान पर बैठे कुबेर के पास हजारों विशालकाय यक्ष और नाखून जैसे कान वाले तथा अत्यन्त वेगवान राक्षस भी बैठे थे। जिस प्रकार देवता इन्द्र को घेरे खड़े रहते हैं, उसी प्रकार सैकड़ों गन्धर्व और अप्सराएँ कुबेर को चारों ओर से घेरे खड़ी थीं।   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  3.161.38-39 
तमासीनं महाकाया: शङ्कुकर्णा महाजवा:।
उपोपविविशुर्यक्षा राक्षसाश्च सहस्रश:॥ ३८॥
शतशश्चापि गन्धर्वास्तथैवाप्सरसां गणा:।
परिवार्योपतिष्ठन्त यथा देवा: शतक्रतुम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अपने विमान पर बैठे कुबेर के पास हजारों विशालकाय यक्ष और नाखून जैसे कान वाले तथा अत्यन्त वेगवान राक्षस भी बैठे थे। जिस प्रकार देवता इन्द्र को घेरे खड़े रहते हैं, उसी प्रकार सैकड़ों गन्धर्व और अप्सराएँ कुबेर को चारों ओर से घेरे खड़ी थीं।
 
Thousands of huge Yakshas and demons with ears like nails and great speed were also sitting near Kubera who was sitting on his plane. Just as the gods stand surrounding Indra, in the same way hundreds of Gandharvas and Apsaras were standing surrounding Kubera from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)