श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.161.37 
स ह्यासनवरं श्रीमत् पुष्पकं विश्वकर्मणा।
विहितं चित्रपर्यन्तमातिष्ठत धनाधिप:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कोषाध्यक्ष कुबेर विश्वकर्मा द्वारा निर्मित सुन्दर एवं उत्कृष्ट विमान पुष्पक पर विराजमान था। वह विमान अद्भुत निर्माण कौशल की पराकाष्ठा था ॥37॥
 
The beautiful and excellent vimana made by Kuber Vishwakarma, the treasurer, was sitting on Pushpaka. That plane was the pinnacle of amazing construction skills. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)