श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.161.34 
ततस्तं हृष्टमनसं पाण्डवान् प्रति भारत।
समीक्ष्य यक्षगन्धर्वा निर्विकारमवस्थिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! पाण्डवों के प्रति कुबेर का हृदय हर्ष से भरा हुआ देखकर यक्ष और गन्धर्व वहाँ बिना किसी भाव के खड़े रहे।
 
Janamejaya! Seeing Kubera's heart filled with joy for the Pandavas, the Yakshas and Gandharvas stood there without any expression.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)