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mahabharat 3.161.21-22h: 'यह सब एक ही मनुष्य ने किया है। इसके बाद जो उचित हो, करो।' दैत्यों के ये वचन सुनकर समस्त यक्षों के स्वामी कुबेर क्रोधित हो उठे। क्रोध से उनके नेत्र लाल हो गए। वे सहसा बोले। 'यह कैसे संभव हुआ?'॥21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  3.161.21-22h 
मानुषेण कृतं कर्म विधत्स्व यदनन्तरम्।
स तच्छ्रुत्वा तु संक्रुद्ध: सर्वयक्षगणाधिप:॥ २१॥
कोपसंरक्तनयन: कथमित्यब्रवीद् वच:।
 
 
अनुवाद
'यह सब एक ही मनुष्य ने किया है। इसके बाद जो उचित हो, करो।' दैत्यों के ये वचन सुनकर समस्त यक्षों के स्वामी कुबेर क्रोधित हो उठे। क्रोध से उनके नेत्र लाल हो गए। वे सहसा बोले। 'यह कैसे संभव हुआ?'॥21 1/2॥
 
'All this has been done by one man. After this, do whatever is appropriate.' Hearing these words of the demons, Kubera, the lord of all the Yakshas, ​​became enraged. His eyes became red with anger. He suddenly spoke. 'How was this possible?'॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)