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mahabharat 3.161.17-18h: हे राजन! वे राक्षस बिखरे हुए केशों सहित यक्षराज कुबेर से इस प्रकार बोले - 'हे प्रभु! आपके वे सब राक्षस भी मारे गये हैं, जो युद्ध में सदैव आगे रहते थे और गदा, परिघ, तलवार, फरसा और प्रशादि के प्रयोग में कुशल थे।   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  3.161.17-18h 
प्रकीर्णमूर्धजा राजन् यक्षाधिपतिमब्रुवन्।
गदापरिघनिस्त्रिंशतोमरप्रासयोधिन:॥ १७॥
राक्षसा निहता: सर्वे तव देव पुर:सरा:।
 
 
अनुवाद
हे राजन! वे राक्षस बिखरे हुए केशों सहित यक्षराज कुबेर से इस प्रकार बोले - 'हे प्रभु! आपके वे सब राक्षस भी मारे गये हैं, जो युद्ध में सदैव आगे रहते थे और गदा, परिघ, तलवार, फरसा और प्रशादि के प्रयोग में कुशल थे।
 
O King! With their hair dishevelled, those demons spoke to the Yaksha King Kubera in this manner - 'O Lord! All your demons too, who were always at the forefront in the war and were skilled in the use of mace, parigha, sword, tomahawk and prasa etc., have been killed. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)