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mahabharat 3.161.15-16: वह बड़ा वेगवान था और बड़े वेग से कोषाध्यक्ष के महल में पहुँचकर भयंकर विलाप करने लगा। भीमसेन का भय उसे अभी भी सता रहा था। उसके हथियार गिर चुके थे और वह थक गया था। उसका कवच रक्त से भीग गया था॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  3.161.15-16 
ते जवेन महावेगा: प्राप्य वैश्रवणालयम्॥ १५॥
भीममार्तस्वरं चक्रुर्भीमसेनभयार्दिता:।
न्यस्तशस्त्रायुधा: क्लान्ता: शोणिताक्ततनुच्छदा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वह बड़ा वेगवान था और बड़े वेग से कोषाध्यक्ष के महल में पहुँचकर भयंकर विलाप करने लगा। भीमसेन का भय उसे अभी भी सता रहा था। उसके हथियार गिर चुके थे और वह थक गया था। उसका कवच रक्त से भीग गया था॥15-16॥
 
He was very fast and reached the palace of the treasurer at a great speed and started crying terribly. The fear of Bhimasena was still tormenting him. He had dropped his weapons and was tired. His armour was soaked in blood.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)