Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.161.10: युधिष्ठिर ने कहा, "वीर भीमसेन! तुमने दुस्साहस या मोहवश जो पापकर्म किया है, वह तुम्हें, जो ऋषिवत जीवन जीते हैं, शोभा नहीं देता। यह राक्षसों का वध व्यर्थ ही हुआ।" | mahabharat अध्याय 3.161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
साहसाद् यदि वा मोहाद् भीम पापमिदं कृतम्।
नैतत् ते सदृशं वीर मुनेरिव मृषा वध:॥ १०॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "वीर भीमसेन! तुमने दुस्साहस या मोहवश जो पापकर्म किया है, वह तुम्हें, जो ऋषिवत जीवन जीते हैं, शोभा नहीं देता। यह राक्षसों का वध व्यर्थ ही हुआ।"
Yudhishthira said, "Valiant Bhimasena! The sinful act that you have committed out of audacity or infatuation is not befitting of you who live like a sage. This slaughter of demons has been done in vain."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥