भुञ्जाना मुनिभोज्यानि रसवन्ति फलानि च॥ ८॥
मेध्यानि हिमवत्पृष्ठे मधूनि विविधानि च।
एवं ते न्यवसंस्तत्र पाण्डवा भरतर्षभा:॥ ९॥
अनुवाद
हिमालय की चोटी पर रहकर वे ऋषियों के खाने योग्य रसीले फल खाते थे और नाना प्रकार के शुद्ध (हिंसा रहित) मधु भी खाते थे। इस प्रकार भरतश्रेष्ठ पाण्डव वहाँ निवास करते थे॥8-9॥
Living on the peak of the Himalayas, they ate the juicy fruits fit for the sages to eat and also various kinds of pure (obtained without violence) honey. Thus the best of the Bharatas, the Pandavas, lived there.॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥