श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  3.160.73-74h 
भङ्‍‍क्‍त्‍वा शूलं गदाग्रेण गदायुद्धविशारद:॥ ७३॥
अभिदुद्राव तं हन्तुं गरुत्मानिव पन्नगम्।
 
 
अनुवाद
किन्तु गदायुद्ध में निपुण भीम ने अपनी गदा के अग्र भाग से त्रिशूल को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और मणिमान को मारने के लिए उस पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे कोई बाज सर्प के प्राण लेने के लिए उस पर आक्रमण करता है। 73 1/2
 
But Bhima, skilled in mace-fighting, broke the trident into pieces with the front part of his mace and attacked Maniman to kill him, just as an eagle attacks a snake to take its life. 73 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)