Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.70-72h: शक्ति के गहन प्रहार से महाधनुर्धर एवं अत्यंत पराक्रमी कुन्तीकुमार भीमसेन के नेत्र क्रोध से व्याकुल हो उठे और उन्होंने शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली एक गदा हाथ में ले ली। उस पर सोने की पट्टियाँ जड़ी हुई थीं। वह पूर्णतः लोहे की बनी थी और शत्रुओं का संहार करने में समर्थ थी। उसे लेकर भीमसेन भयंकर गर्जना करते हुए बड़े वेग से महाबली मणिमान की ओर दौड़े। | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शक्ति के गहन प्रहार से महाधनुर्धर एवं अत्यंत पराक्रमी कुन्तीकुमार भीमसेन के नेत्र क्रोध से व्याकुल हो उठे और उन्होंने शत्रुओं का भय बढ़ाने वाली एक गदा हाथ में ले ली। उस पर सोने की पट्टियाँ जड़ी हुई थीं। वह पूर्णतः लोहे की बनी थी और शत्रुओं का संहार करने में समर्थ थी। उसे लेकर भीमसेन भयंकर गर्जना करते हुए बड़े वेग से महाबली मणिमान की ओर दौड़े।
Due to the deep blow of Shakti, the eyes of the great archer and extremely valiant Kuntikumar Bhima became restless with anger and he took a mace in his hand which was used to increase the fear of enemies. It had gold plates embedded on it. It was made entirely of iron and was capable of destroying enemies. Taking it, Bhimasena roared fiercely and ran towards the mighty Maniman with great speed. 70-71 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥