श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.160.7-8h 
वैशम्पायन उवाच
एतदात्महितं श्रुत्वा तस्याप्रतिमतेजस:॥ ७॥
शासनं सततं चक्रुस्तथैव भरतर्षभा:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन् ! अतुलनीय तेजस्वी अष्टतिषेण के इन हितकारी वचनों को सुनकर भरतकुलभूषण पाण्डवों ने सदैव उसी प्रकार उनकी आज्ञा का पालन किया ॥7 1/2॥
 
Vaishampayanji said – King! Hearing these beneficial words of the incomparable Tejaswi Ashtishena, the Pandavas of Bharatkulbhushan always followed her orders in the same manner. 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)