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mahabharat 3.160.68: तत्पश्चात् उस बुद्धिमान राक्षस ने उसी समय लोहे की बनी हुई सुवर्णमयी छड़ी से विभूषित भयंकर शक्ति से प्रहार किया ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  3.160.68 
तत: शक्तिं महाघोरां रुक्मदण्डामयस्मयीम्।
तस्मिन्नेवान्तरे धीमान् प्रजहाराथ राक्षस:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उस बुद्धिमान राक्षस ने उसी समय लोहे की बनी हुई सुवर्णमयी छड़ी से विभूषित भयंकर शक्ति से प्रहार किया ॥68॥
 
Thereafter, the intelligent demon at the same time struck with a terrible force adorned with a golden rod made of iron. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)