Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.160.66: किन्तु वे सभी बाण मणिमांकी की गदा से लगते ही नष्ट हो गए। यद्यपि वे बड़े वेग से छोड़े गए थे, तथापि गदा चलाने में निपुण मणिमांकी गदा का वेग सहन न कर सका। 66॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.160.66 
प्रत्यहन्यन्त ते सर्वे गदामासाद्य सायका:।
न वेगं धारयामासुर्गदावेगस्य वेगिता:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
किन्तु वे सभी बाण मणिमांकी की गदा से लगते ही नष्ट हो गए। यद्यपि वे बड़े वेग से छोड़े गए थे, तथापि गदा चलाने में निपुण मणिमांकी गदा का वेग सहन न कर सका। 66॥
 
But all those arrows were destroyed after hitting Manimanki's mace. Although they were released with great speed, Manimanki, adept at wielding the mace, could not bear the speed of the mace. 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)