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mahabharat 3.160.60: वहाँ पराक्रमी योद्धा ने अपना अधिकार और पराक्रम दोनों प्रदर्शित किए। उस समय अपने सैनिकों को युद्ध से विमुख होते देख वह मुस्कुराया और उनसे बोला -॥60॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.160.60 
अदर्शयदधीकारं पौरुषं च महाबल:।
स तान् दृष्ट्वा परावृत्तान् स्मयमान इवाब्रवीत्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पराक्रमी योद्धा ने अपना अधिकार और पराक्रम दोनों प्रदर्शित किए। उस समय अपने सैनिकों को युद्ध से विमुख होते देख वह मुस्कुराया और उनसे बोला -॥60॥
 
There the mighty warrior displayed both his authority and his valour. At that time, seeing his soldiers turning away from the battle, he smiled and spoke to them -॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)