Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.6-7h: क्योंकि आर्ष्टिसेन ने जो कुछ कहा था, उसके अनुसार कुबेर अवश्य ही वहाँ आये होंगे। हे तपस्वी! मैं यह सब विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ; क्योंकि पाण्डवों की कथा सुनकर मैं संतुष्ट नहीं हूँ। | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र ह्यायाति धनद आर्ष्टिषेणो यथाब्रवीत्।
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं विस्तरेण तपोधन॥ ६॥
न हि मे शृण्वतस्तृप्तिरस्ति तेषां विचेष्टितम्।
अनुवाद
क्योंकि आर्ष्टिसेन ने जो कुछ कहा था, उसके अनुसार कुबेर अवश्य ही वहाँ आये होंगे। हे तपस्वी! मैं यह सब विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ; क्योंकि पाण्डवों की कथा सुनकर मैं संतुष्ट नहीं हूँ।
Because according to what Aarshtisena had told, Kubera must have been visiting there. O ascetic! I want to hear all this in detail; because I am not satisfied with hearing the stories of the Pandavas. 6 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥