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mahabharat 3.160.56: सब ओर से गर्जना करते हुए और भयंकर स्वर में चिल्लाते हुए भी समस्त राक्षसों को भीमसेन के मन में भय का लेशमात्र भी नहीं दिखाई दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  3.160.56 
अभितर्जयमानाश्च रुवन्तश्च महारवान्।
न मोहं भीमसेनस्य ददृशु: सर्वराक्षसा:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
सब ओर से गर्जना करते हुए और भयंकर स्वर में चिल्लाते हुए भी समस्त राक्षसों को भीमसेन के मन में भय का लेशमात्र भी नहीं दिखाई दिया।
 
Roaring from all sides and screaming in a terrifying voice, all the demons did not see the slightest trace of fear in Bhimasena's mind. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)