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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना
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श्लोक 48
श्लोक
3.160.48
गदापरिघनिस्त्रिंशशूलशक्तिपरश्वधा:।
प्रगृहीता व्यरोचन्त यक्षराक्षसबाहुभि:॥ ४८॥
अनुवाद
उस समय उन यक्षों और राक्षसों के हाथों में गदा, तलवार, भाला, बर्छी और कुल्हाड़ी आदि अस्त्र-शस्त्र बड़ी चमक पैदा कर रहे थे ॥48॥
At that time, weapons like mace, sword, spear, spear and axe etc. were creating a great brilliance in the hands of those Yakshas and demons. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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