श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.160.47 
तत: प्रहृष्टरोमाणस्तं शब्दमभिदुद्रुवु:।
यक्षराक्षसगन्धर्वा: पाण्डवस्य समीपत:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तब यक्ष, राक्षस और गन्धर्व उत्तेजित होकर उस शब्द को लक्ष्य करके पाण्डु नन्दन भीमसेन की ओर दौड़े॥47॥
 
Then the Yakshas, ​​Rakshasas and Gandharvas became excited and, aiming at that word, came running towards Pandu Nandan Bhimsen. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)