Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.43-44: वहाँ के अत्यंत सुंदर वृक्ष नाना प्रकार के प्रकाश से चमक रहे थे। उनकी मंजरियाँ विचित्र लग रही थीं। वे सब-की-सब अद्भुत और अनिर्वचनीय लग रही थीं। भरतश्रेष्ठ भीम ने दैत्यराज कुबेर के उस स्थान को बहुत से रत्नों से सुशोभित और विचित्र मालाओं से सुशोभित देखा। 43-44॥ | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ के अत्यंत सुंदर वृक्ष नाना प्रकार के प्रकाश से चमक रहे थे। उनकी मंजरियाँ विचित्र लग रही थीं। वे सब-की-सब अद्भुत और अनिर्वचनीय लग रही थीं। भरतश्रेष्ठ भीम ने दैत्यराज कुबेर के उस स्थान को बहुत से रत्नों से सुशोभित और विचित्र मालाओं से सुशोभित देखा। 43-44॥
The very beautiful trees there were shining with different types of light. Their manjaris looked strange. All of them seemed amazing and inexplicable. Bhima, the best of Bharat, saw that place of the demon king Kuber adorned with a multitude of gems and decorated with strange garlands. 43-44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥