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mahabharat 3.160.42: गन्धमादन से उठती हुई वायु समस्त सुगन्ध को लेकर तथा समस्त प्राणियों को प्रसन्न करती हुई सुखद मंद गति से बह रही थी ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.160.42 
मोदयन् सर्वभूतानि गन्धमादनसम्भव:।
सर्वगन्धवहस्तत्र मारुत: सुसुखो ववौ॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
गन्धमादन से उठती हुई वायु समस्त सुगन्ध को लेकर तथा समस्त प्राणियों को प्रसन्न करती हुई सुखद मंद गति से बह रही थी ॥42॥
 
The air rising from Gandhamadana was flowing at a pleasant slow pace carrying all the fragrance and making all the living beings happy. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)