Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.160.41: भीमसेन ने अपनी भुजा को फैलाकर धनुष की नोक को स्थिर किया और बड़े दुःख के साथ कोषाध्यक्ष कुबेर के नगर की ओर देखा।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.160.41 
धनुष्कोटिमवष्टभ्य वक्रभावेन बाहुना।
पश्यमान: स खेदेन द्रविणाधिपते: पुरम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन ने अपनी भुजा को फैलाकर धनुष की नोक को स्थिर किया और बड़े दुःख के साथ कोषाध्यक्ष कुबेर के नगर की ओर देखा।
 
Stabilising the tip of his bow with his outstretched arm, Bhimasena looked with great sorrow at the city of the treasurer Kubera. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)