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mahabharat 3.160.40: उस भवन में चारों ओर अनेक सुन्दर अप्सराएँ नृत्य कर रही थीं और हवा में लहराते हुए झंडे भवन की शोभा बढ़ा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.160.40 
विलासिनीभिरत्यर्थं नृत्यन्तीभि: समन्तत:।
वायुना धूयमानाभि: पताकाभिरलंकृतम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उस भवन में चारों ओर अनेक सुन्दर अप्सराएँ नृत्य कर रही थीं और हवा में लहराते हुए झंडे भवन की शोभा बढ़ा रहे थे।
 
In that building many luscious nymphs were dancing all around and flags fluttering in the wind were adorning the building.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)