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mahabharat 3.160.37: तत्पश्चात् भरतश्रेष्ठ भीमसेन ने कुबेर का निवास देखा, जो सुवर्ण और स्फटिक के भवनों से सुशोभित था ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.160.37 
ततो वैश्रवणावासं ददर्श भरतर्षभ:।
काञ्चनै: स्फाटिकैश्चैव वेश्मभि: समलंकृतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भरतश्रेष्ठ भीमसेन ने कुबेर का निवास देखा, जो सुवर्ण और स्फटिक के भवनों से सुशोभित था ॥37॥
 
Thereafter, Bhimasena, the best of Bharat, saw the abode of Kubera, which was adorned with buildings made of gold and crystal. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)