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mahabharat 3.160.35: वह पर्वत बहुत ही ऊबड़-खाबड़, दुर्गम और भयानक था। उसकी ऊँचाई अनेक ताड़ के वृक्षों के बराबर थी और उस पर चढ़ने का एक ही मार्ग था, फिर भी महाबली भीमसेन उसके शिखर पर चढ़ गए।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.160.35 
तदेकायनमासाद्य विषमं भीमदर्शनम्।
बहुतालोच्छ्रयं शृङ्गमारुरोह महाबल:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह पर्वत बहुत ही ऊबड़-खाबड़, दुर्गम और भयानक था। उसकी ऊँचाई अनेक ताड़ के वृक्षों के बराबर थी और उस पर चढ़ने का एक ही मार्ग था, फिर भी महाबली भीमसेन उसके शिखर पर चढ़ गए।
 
That mountain was rugged and rugged and looked terrifying. Its height was equal to that of many palm trees and there was only one way to climb it, yet the mighty Bhimasena climbed to its peak. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)