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mahabharat 3.160.33: पाण्डव पुत्र भीम ने गदा हाथ में लेकर द्रौपदी का आनन्द बढ़ाते हुए, अपना भय और घबराहट त्यागकर पर्वत पर चढ़ गये।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.160.33 
द्रौपद्या वर्धयन् हर्षं गदामादाय पाण्डव:।
व्यपेतभयसम्मोह: शैलराजं समाश्रित:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव पुत्र भीम ने गदा हाथ में लेकर द्रौपदी का आनन्द बढ़ाते हुए, अपना भय और घबराहट त्यागकर पर्वत पर चढ़ गये।
 
Pandava's son Bhima, taking his mace in his hand and increasing the joy of Draupadi, leaving behind his fear and nervousness, climbed the mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)