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mahabharat 3.160.32: उस समय समस्त प्राणियों ने भीमसेन को धनुष-बाण लिये हुए उन्मत्त हाथी और मृगराज के समान आते देखा।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.160.32 
तं मृगेन्द्रमिवायान्तं प्रभिन्नमिव वारणम्।
ददृशु: सर्वभूतानि बाणकार्मुकधारिणम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त प्राणियों ने भीमसेन को धनुष-बाण लिये हुए उन्मत्त हाथी और मृगराज के समान आते देखा।
 
At that time all creatures saw Bhimasena, carrying a bow and arrow, approaching like a mad elephant and a king of deer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)