स केसरीव चोत्सिक्त: प्रभिन्न इव वारण:।
व्यपेतभयसम्मोह: शैलमभ्यपतद् बली॥ ३१॥
अनुवाद
भय और मोह से मुक्त होकर शक्तिशाली भीमसेन उस पर्वत पर चढ़ने लगे, जैसे आनंद में मदमस्त सिंह और मतवाले हाथी की तरह।
The powerful Bhimasena, free from all fear and delusion, began to climb the mountain like a lion intoxicated with ecstasy and an elephant flowing in its drunken state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥