Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.30: उसका हृदय विशाल था, उसके सभी अंग सुन्दर थे, उसकी गर्दन शंख के समान थी और उसकी भुजाएँ विशाल थीं। वह अपने धनुष, तलवार और तरकश, जिनकी पृष्ठिकाएँ स्वर्णमय थीं, को बार-बार हिलाता रहता था। | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महात्मा चारुसर्वाङ्ग: कम्बुग्रीवो महाभुज:।
रुक्मपृष्ठं धनु: खड्गं तूर्णाश्चापि परामृशत्॥ ३०॥
अनुवाद
उसका हृदय विशाल था, उसके सभी अंग सुन्दर थे, उसकी गर्दन शंख के समान थी और उसकी भुजाएँ विशाल थीं। वह अपने धनुष, तलवार और तरकश, जिनकी पृष्ठिकाएँ स्वर्णमय थीं, को बार-बार हिलाता रहता था।
His heart was great, all his limbs looked beautiful, his neck was like a conch and his arms were large. He would repeatedly stroke his bow, sword and quiver which had golden backs.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥