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mahabharat 3.160.29: उसकी आँखें लाल थीं। उसके दोनों कंधे मज़बूत थे। उसका पराक्रम पागल हाथी जैसा था। उसके दाँत शेर के जबड़े जैसे थे। उसके कंधे विशाल थे। वह साल के पेड़ जितना ऊँचा लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.160.29 
लोहिताक्ष: पृथुुव्यंसो मत्तवारणविक्रम:।
सिंहदंष्ट्रो बृहत्स्कन्ध: शालपोत इवोद्‍गत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखें लाल थीं। उसके दोनों कंधे मज़बूत थे। उसका पराक्रम पागल हाथी जैसा था। उसके दाँत शेर के जबड़े जैसे थे। उसके कंधे विशाल थे। वह साल के पेड़ जितना ऊँचा लग रहा था।
 
His eyes were red. Both his shoulders were robust. His prowess was like that of a mad elephant. His teeth resembled the jaws of a lion. His shoulders were huge. He appeared to be as tall as a sal tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)