श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.160.28 
सिंहर्षभगति: श्रीमानुदार: कनकप्रभ:।
मनस्वी बलवान् दृप्तो मानी शूरश्च पाण्डव:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उनकी चाल विशाल सिंह के समान थी। वे कनक के समान सुन्दर, उदार और तेजस्वी थे। पाण्डुनन्दन भीम बुद्धिमान, बलवान, गौरवान्वित, प्रतिष्ठित और वीर थे। 28॥
 
His gait was like that of a great lion. He was handsome, generous and as radiant as Kanaka. Pandunandan Bhima was wise, strong, proud, respected and brave. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)