Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.27: द्रौपदी की यह बात सुनकर बलवान भीमसेन को लगा कि यह तो उन पर ही आरोप है। जिस प्रकार एक अच्छा बैल कोड़े की मार सहन नहीं कर सकता, उसी प्रकार वह इस आरोप को सहन नहीं कर सकते। | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: क्षिप्तमिवात्मानं द्रौपद्या स परंतप:।
नामृष्यत महाबाहु: प्रहारमिव सद्भव:॥ २७॥
अनुवाद
द्रौपदी की यह बात सुनकर बलवान भीमसेन को लगा कि यह तो उन पर ही आरोप है। जिस प्रकार एक अच्छा बैल कोड़े की मार सहन नहीं कर सकता, उसी प्रकार वह इस आरोप को सहन नहीं कर सकते।
On hearing this from Draupadi, the powerful Bhimasena felt that this was an accusation on himself. Just as a good bull cannot bear the whipping, similarly he could not bear this accusation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥