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mahabharat 3.160.25-26: 'तत्पश्चात् आपके सभी मित्रगण भय और आसक्ति से रहित, विचित्र माला धारण किए हुए, शिवस्वरूप धारण किए हुए इस सुन्दर शैलशिखर का दर्शन करें। भीम! मैं बहुत समय से मन में यही विचार कर रहा हूँ। मैं आपके पराक्रम से सुरक्षित इस शैलशिखर का दर्शन करना चाहता हूँ। 25-26॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  3.160.25-26 
तत: शैलोत्तमस्याग्रं चित्रमाल्यधरं शिवम्।
व्यपेतभयसम्मोहा: पश्यन्तु सुहृदस्तव॥ २५॥
एवं प्रणिहितं भीम चिरात् प्रभृति मे मन:।
द्रष्टुमिच्छामि शैलाग्रं त्वद्‍बाहुबलपालिता॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'तत्पश्चात् आपके सभी मित्रगण भय और आसक्ति से रहित, विचित्र माला धारण किए हुए, शिवस्वरूप धारण किए हुए इस सुन्दर शैलशिखर का दर्शन करें। भीम! मैं बहुत समय से मन में यही विचार कर रहा हूँ। मैं आपके पराक्रम से सुरक्षित इस शैलशिखर का दर्शन करना चाहता हूँ। 25-26॥
 
'After that, all your friends should see this beautiful rock-peak wearing a strange garland and in the form of Shiva, without fear and attachment. Bheem! I have been thinking this in my mind for a long time. I want to visit this rock peak protected by your might. 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)