श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.160.18 
तत्र पुष्पाणि दिव्यानि सुहृद्भि: सह पाण्डवा:।
ददृशु: पञ्चवर्णानि द्रौपदी च यशस्विनी॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों ने अपने मित्रों सहित जाकर पाँच रंगों वाली मालाओं में पिरोए हुए दिव्य पुष्पों को देखा। शोभायमान द्रौपदी ने भी उन पुष्पों को देखा॥18॥
 
The Pandavas, along with their friends, went and saw the divine flowers strung together in garlands, which were of five colours. The glorious Draupadi also saw those flowers.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)