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mahabharat 3.160.14: उनका हृदय शुद्ध था और वे संयमपूर्वक उत्तम व्रतों का पालन करने वाले थे। एक दिन वे समस्त पाण्डवों से मिलने आए। भरतों में सर्वाधिक पूजनीय पाण्डवों ने उनके साथ दिव्य चर्चा की॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.160.14 
आजग्मु: पाण्डवान् द्रष्टुं शुद्धात्मानो यतव्रता:।
ते तै: सह कथां चक्रुर्दिव्यां भरतसत्तमा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उनका हृदय शुद्ध था और वे संयमपूर्वक उत्तम व्रतों का पालन करने वाले थे। एक दिन वे समस्त पाण्डवों से मिलने आए। भरतों में सर्वाधिक पूजनीय पाण्डवों ने उनके साथ दिव्य चर्चा की॥14॥
 
His heart was pure and he was a follower of the best vows with discipline and self-control. One day he came to meet all the Pandavas. The Pandavas, who were the most revered amongst the Bharatas, had divine discussions with him.॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)