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mahabharat 3.160.10: वहाँ रहते हुए उन्होंने पाँचवाँ वर्ष बिताया और उन दिनों में वे लोमशजी से अनेक प्रकार की कथाएँ सुना करते थे॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान‍्का वध करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.160.10 
तथा निवसतां तेषां पञ्चमं वर्षमभ्यगात्।
शृण्वतां लोमशोक्तानि वाक्यानि विविधान्युत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहते हुए उन्होंने पाँचवाँ वर्ष बिताया और उन दिनों में वे लोमशजी से अनेक प्रकार की कथाएँ सुना करते थे॥ 10॥
 
He spent his fifth year living there. During those days he used to listen to various stories told by Lomashaji.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)