Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.160.1-2: जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! मेरे सभी पूर्वज, दिव्य पराक्रमी महामना पाण्डव, गंधमादन पर्वत पर अष्टिसेण के आश्रम में कितने समय तक रहे थे? वे सभी बड़े वीर, महान बल और पुरुषार्थ से संपन्न थे। वहाँ रहकर उन्होंने क्या किया था? 1-2॥ | mahabharat अध्याय 3.160: पाण्डवोंका आर्ष्टिषेणके आश्रमपर निवास, द्रौपदीके अनुरोधसे भीमसेनका पर्वतके शिखरपर जाना और यक्षों तथा राक्षसोंसे युद्ध करके मणिमान्का वध करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! मेरे सभी पूर्वज, दिव्य पराक्रमी महामना पाण्डव, गंधमादन पर्वत पर अष्टिसेण के आश्रम में कितने समय तक रहे थे? वे सभी बड़े वीर, महान बल और पुरुषार्थ से संपन्न थे। वहाँ रहकर उन्होंने क्या किया था? 1-2॥
Janamejaya asked – Brahmin! For how long did all my ancestors, the divinely mighty Mahamana Pandavas, stay in the ashram of Ashtishena on Mount Gandhamadan? All of them were very brave and endowed with great strength and manliness. What did he do while staying there? 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥