श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.16.32 
आश्वसध्वं न भी: कार्या सौभराडद्य नश्यति।
मयाभिपन्नो दुष्टात्मा ससौभो विनशिष्यति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'धैर्य रखो, डरो मत, सौभराज अब नष्ट हो रहा है। जैसे ही दुष्टात्मा शाल्व मेरा सामना करेगा, सौभ अपने विमान सहित नष्ट हो जाएगा।'॥32॥
 
'Have patience, do not be afraid, Saubharaj is being destroyed now. As soon as the evil soul Shalva faces me, Saubha will be destroyed along with his aircraft.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)