श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.16.15 
ततो मायामयं जालं माययैव विदीर्य स:।
साम्ब: शरसहस्रेण रथमस्याभ्यवर्षत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
साम्ब ने माया से ही उस मायावी धनुष जाल को फाड़ डाला और क्षेमवृद्धि के रथ पर हजारों बाणों की वर्षा कर दी ॥15॥
 
Samba tore apart that illusive bow net with the help of illusion itself and fired a volley of thousands of arrows at the chariot of Kshemavriddhi. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)