श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.16.14 
तत: साम्बाय राजेन्द्र क्षेमवृद्धिरपि स्वयम्।
मुमोच मायाविहितं शरजालं महत्तरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् क्षेमवृद्धि ने स्वयं ही साम्ब पर माया से निर्मित भारी बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥14॥
 
Rajendra! Thereafter, Kshemavruddhi herself started raining heavy arrows made of illusion on Samba. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)