श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.16.12-13 
तस्य बाणमयं वर्षं जाम्बवत्या: सुतो महत्।
मुमोच भरतश्रेष्ठ यथा वर्षं सहस्रदृक्॥ १२॥
तद् बाणवर्षं तुमुलं विषेहे स चमूपति:।
क्षेमवृद्धिर्महाराज हिमवानिव निश्चल:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! जाम्बवतीकुमार ने उन पर भारी बाणों की वर्षा की, मानो इन्द्र जल बरसा रहे हों। महाराज! सेनापति क्षेमवृद्धि ने हिमालय के समान अविचल रहकर शम्बक के उस भयंकर बाणों की वर्षा को सहन किया। 12-13॥
 
Bharatshrestha! Jambavati Kumar showered heavy arrows on him, as if Indra was showering water. Maharaj! Commander Kshemavruddhi endured that fierce rain of arrows of Sambaka, remaining unmoving like the Himalayas. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)