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mahabharat 3.159.25: शत्रुसूदन पार्थ! चपलता के कारण राक्षस इस मार्ग पर आगे जाने वाले मनुष्यों को लोहे के शूलों आदि से मार डालते हैं॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.159: प्रश्नके रूपमें आर्ष्टिषेणका युधिष्ठिरके प्रति उपदेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 159: प्रश्नके रूपमें आर्ष्टिषेणका युधिष्ठिरके प्रति उपदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.159.25 
चापलादिह गच्छन्तं पार्थ यानमित: परम्।
अय:शूलादिभिर्घ्नन्ति राक्षसा: शत्रुसूदन॥ २५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन पार्थ! चपलता के कारण राक्षस इस मार्ग पर आगे जाने वाले मनुष्यों को लोहे के शूलों आदि से मार डालते हैं॥25॥
 
Shatrusudan Partha! Due to agility, the demons kill the people who go further on this path with iron spikes etc. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)