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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 159: प्रश्नके रूपमें आर्ष्टिषेणका युधिष्ठिरके प्रति उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.159.18 
अरजांसि च वासांसि वसाना: कौशिकानि च।
दृश्यन्ते बहव: पार्थ गन्धर्वाप्सरसां गणा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! यहाँ अनेक गंधर्व और अप्सराएँ दिखाई दे रही हैं। कुछ ने स्वच्छ वस्त्र धारण किए हैं और कुछ ने रेशमी वस्त्र धारण किए हैं।
 
O son of Kunti, one can see many Gandharvas and Apsaras here. Some of them wear clean clothes and some are adorned with silken clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)